Thursday, 17 March 2011

जीवन

जीवन मे कभी कभी अप्रत्याशित घट जाता है या यू कहें,जीवन अप्रत्याशित पल के मनके की माला है
ऎसा ही एक पल मेरे जीवन में भी आया ,जब मुझे आप सभी महानुभावों के सहयोग शुभकामनाओं व दिशानिद्रेशों को पाने का सुअवसर मिला.
चूंकि मेरा इस आधुनिक तकनीक से परिचय बहुत ही अल्प है अतः आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि मुझे कुछ समय दें ताकि मै भी आप सभी के विचारों को पढ़ पाऊ और प्रेरित हो सकूं


                                                        मन के - मनके

8 comments:

  1. आपका साहित्य तकनीक पर विजय अवश्य प्राप्त करेगा।

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  2. उनको रंग लगाएँ, जो भी खुश होकर लगवाएँ,
    बूढ़ों और असहायों को हम, बिल्कुल नहीं सताएँ,
    करें मर्यादित हँसी-ठिठोली।
    आओ हम खेलें हिल-मिल होली।।
    --
    होलिकोत्सव की सुभकामनाएँ!

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  3. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    नि:शुल्‍क संस्‍कृत सीखें । ब्‍लागजगत पर सरल संस्‍कृतप्रशिक्षण आयोजित किया गया है
    संस्‍कृतजगत् पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो संस्‍कृत के प्रसार में अपना योगदान दें ।

    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

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  4. तकनीकी से मनुष्य आगे है पीछे नही ... आशा है जल्दी ही आप कामयाब होंगी ...

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  5. " भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" की तरफ से आप को तथा आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामना. यहाँ भी आयें. www.upkhabar.in

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  6. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं संजय भास्कर हार्दिक स्वागत करता हूँ.

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