Sunday, 18 September 2016

The Combo Plan Of The Existence


                         

The Combo Plan Of The Existence
Desires and longings
Wishes and prayers
Conscious and Intentions
Are the waves—
On the current of the Time and Space.
Karmas—created—
Created Karmas-
Sow the seed of Karmas-
And—
Pushes and pulls are ways of the Existence-
Existence works with-law of physics--Vow!! 
Give us—two choices—always,
Meant to pick one-at a time,
Otherwise we know-we fall down??
Friends:
An echo, ever-ever is there--
Some times,-audible faintly-but
Most of the times—it is,
audible,clearly!!
So,never be in despair.
Accept His Plan with gratitude.
He is the best Planner and,
The best—Judge-
He never fails to deliver our dues.
Good or bad???
Love you all-so much.

Monday, 12 September 2016

एक घरोंदा प्यार का-




एक घरोंदा प्यार का—
    मैंने भी यूं नही बनाया
    खिलोने तो और भी—
    बहुत थे--
    खेलने के लिये—
   इसको खिलोना समझ—
खरीदा भी नहीं था—
छीना भी नहीं था,किसी और से
यह एक बहाना भी नहीं था—
खुद से-किसी और से भी नहीं
मेरे वज़ूद से कतरा-कतरा होते रहे
दिन-रात मेरे---
हर-एक सपने मेरे—
सपनों को ईंट की तरह-
चिनती रही—
इंतजारी गारे में घोल कर
बे-खबर थी---
सपने तो सपने ही होते हैं
कुछ और होते नहीं
कल किसी को कहते सुना था-कि
सुबह की होन में-एक सपना
बन चांद का टुकडा—
आ गिरा—
आंगन के फर्श पर-
और—गोद में यूं बिखर गया,कि
चांदनी बिखर गयी हो,जैसे-
आंगन के फर्श पर—
मैंने भी सोचा—चाहा भी
सपनों की ईंटों को चिन-चिन
इंतजारी गारे में घोल कर
एक घरोंदा मैं भी बना लूं
फिर,उस सपनों को-
सुबह की होन में
खुली आंखो से मैं भी देख लूं
और—
एक घरोंदा प्यार का
टूटे नहीं—
बहानों के झूठ में,और
प्यार का घरोंदा—
जमुनाई आसुओं के किनारे
ताजमहल सा—
संगमर्मरी हो जाय-
हर आस बिखरती रहे
मैं,जमुनाई आसुंओं के किनारे बैठ कर
इंतजार करती रही—
ताज के खडे होने का—
और—
ताज के गढने के लिये--
एक शाहेजहां कहां था?
मुमताज तो दफन थी
कब्र में—
झरोखों से झांकता
शाहेजहां पहले से ही लिपटा हुआ था,
ना-उमीदों के कफन में--
एक घरोंदा प्यार का-
मैंने भी यूं नहीं बनाया था.




Thursday, 18 August 2016

अब मेरे पास सपनों के अलावा और शायद,कुछ और नहीं है




शुभप्रभात मित्रों—आपका दिन मंगलमय हो,और कल बधीं राखियों की डोर अभी ढीली ना हुई हो—ऐसी कामना के साथ:
आज कह रही हूं-कुछ अंदाजे बयां और में—कृपया कुछ तो कहा करिये??
अब मेरे पास सपनों के अलावा और शायद,कुछ और नहीं है
साल-दर-साल गुजर गये-पीडाओं को उम्मीदों की डोर में,सपनों को पिरोते-पिरोते—
कभी कागजी-चिंदियों पर बे-बात की लकीरे खींचती रही,
कभी,उम्मीदों के तीर पर बैठी-कागजी नाव को खैती रही,
कभी,सपनों की कश्ती को सूखे पानी पर भिगोती रही,
कभी,किसी मित्र को कहती रही—मित्र,तुम चटक मत जाना,और,
वहां चटकन के अलावा कुछ शेष और ना था,
कभी चटकती धूप में इंद्रधनुष के चटकने का इंतजार था,मुझे
हाहाहा—-
कभी ऐसा भी भला हो सकता है—पागल थी मैं,
कभी गुनगुनाती रही—मेहराबों पर लटके बंदनवार सिमट जाते हैं--
बारात गुजर जाने के बाद—समेटने ही होते हैं--??
कभी पतझड की पाती पर-प्रेम की पाती लिखती रही थी मैं---
हा-हा—हा—पागल थी मैं.
और,अब जाना सालो-सालों बाद—
यह हाला है-
यह प्याला है—
यह माधुशाला है—
यह जीवन की मधुशाला है-
नशे-नशे में फ़र्क नहीं-
फ़र्क है तो असर नहीं-
-------------------------???
जब होश ना हो अपनों का-
जब गम ना हो बेगानों का-
अपनों से दूर छिटक-
गैरों का हाथ पकड—
जब थामा हो जाम—
सपनों का—
नशा तो बस नशा है.
अभी भी—बिखरे हैं,स्वर्ग—चारों तरफ.

Thursday, 28 July 2016

शुभप्रभात,मित्रों.बात आज के अखबार की.



शुभप्रभात,मित्रों.बात आज के अखबार की.
’मित्र’ एक बेहद खूबसूरत शब्द,यदि महसूस किया जा सके?
आज की बात—
सुबह-सुबह,अखबार हाथ में है,बीच-बीच में,चाय की चुस्कियां भी,
दो मेरीगोल्ड के बिस्कुटों के साथ,और शुरूआत जिंदगी की एक और
सुबह से--
धन्यवाद ’तुझे’ कि एक दिन और दे दिया-रात सोई थी,सुबह जगा दिया,आमीन!!
अब ,देने वाले ने अपना काम कर ही दिया—
क्या हम इस दिन की खूबसूरती बरकरार रख पाएंगे—देखना है,जब शाम सोने जांये??
जिंदगी बहुत खूबसूरत है—यह जुमला कह-कह चले गये-जाने वाले इस दुनिया से,और
जिंदगी बे-हद बदसूरत है-इसे भी कहना पड जाता है-अक्सर??
आइये:
पिछले दो-तीन दिनों की ऐसी खबरों से रूबरू हुआ जाय-जो खास खबर होने का दम-खम नहीं रखतीं-ऐसे गुजर जाती हैं-कि अरे,चलता है—
१.कल मेरी काम वाली-नहीं मेरी शुभचिंतक बेवी आई और हम दौंनो चाय शेअर करते हैं-सुबह की,बेशक मैं चाय पी चुकी होती हूं-जिंदगी शेअरिंग ही है.
सुना रही थी एक घटना-जहां वह रहती है-वहां एक ग्राहक महिला दुकान पहुंचती है-उसे शक है,कि एक किलो चीनी जो उसने वहां से खरीदी थी-तौल में कम है,सो,
उसने दुकानदार से कहा-कि चीनी तौल में कम है—शायद २५० ग्राम.
और,इस २५० ग्राम चीनी में १० लोंगो के सिर फूट गये-एक की मौत हो गयी,
दो-चार अस्पताल में मरने के इंतजार में हैं-पुलिस वाले-तमाशे-हकीकत-उसी की पहरेदारी कर रहे हैं-जिसने सिर फोडे-
ए,जिंदगी,तू २५० ग्राम चीनी की तौल में भी तुलती है???
२.कल के अखबार में एक खबर एक कोने में पडी हुई—
किसी दूसरे शहर में-एक सज्जन तीन भुट्टे खा लेते हैं-भुट्टे वाला पैसे मांगता है.और गोली चल जाती है—बेचारा भुत्टे वाला वहीं ढेर हो जाता है??
कमाल देखिये,भुत्टे खाने वाला भी अपने-आप को गोली मार लेता है.
कसूर किसका-भुट्टे बेचने वाले-भुट्टे खाने वाले का-कि बेचारे भुट्टे का??
पुलिस भी हैरान है.
समझ से परे-हमारी जिंदगी होती जा रही है??
३.आज,सुबह-सुबह मेरे शहर में बादलों वाला मौसम है-रात बारिश हुई है-सब कुछ भीगा-भीगा सा है-कल शाम करीब सात बजे मैं बारिश में घिर गयी थी-होसला लिये घर आ गयी-५ किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटों में तय हुई-आ गयी सकुशल-वरना,
हमारे शहरों की सडकें करीब-करीब ६ महीने के हिसाब से बनती हैं-क्योंकि बाकी ६ महीने बैठा तो नहीं जा सकता,काम तो होना ही चाहिये,कर्म में विश्वास रखते हैं-और,माया आनी-जानी है—सो,आती-जाती रहनी चाहिये.
आइये,बात से हट गयी—महज १५ रुपये की देनदारी के लिये कत्ल पति-पत्नि का,-
वाह!! कहने को जी चाहता है??
हम सब संस्कारी लोग हैं-हजारों वर्षों के संस्कार ढो रहे हैं-दमडी को दांतों में दबाए-
जान जाय पर दमडी नाजाय!!
जिंदगी—यह तो ऊपर वाले के हाथ में है-
जब दे दे-और अब ले ले.
मिलेंगे—अगले जनम में.
ईश्वर आपको लंबी उम्र दे!!
हां:
लगता नहीं है दिल मेरा उजडे दयार में,
कोई हसरतों से कह दे कहीं और जा बसें-
लाये थे मांग के दो-चार दिन—
दो आरज़ू में कट गये-
दो इंतजार में—
्फिर भी उम्मीदों के बीज डालते रहिये-
बारिश के मौसम में सम्भावना है-
कुछ तो फूट आएंगे ही,आमीन!!
नमस्कार,आपका दिन मंगलमय हो!!!