Monday, 31 October 2011

बर्फ़ के फ़र्श पर

जिस,बर्फ़ के फ़र्श पर
हम-तुम,चले थे,चार कदम,साथ-साथ
                वो,अभी पिघली नहीं है---
बेशक: ,छूटे हुए कदमों के निशां,दिखते नहीं हैं
पर,उस पिघली हुई,बर्फ़ के फ़र्श पर---------
इंतज़ारों में,नज़र आते हैं,अब तलक—
                    बेशक:,वो हमारी सांसों के,अनछुए गीत,कुछ खामोश से हैं
                    पर,उस पिघली हुई बर्फ़ के फ़र्श पर----
थिरकते हैं,अब तलक-----
बेशकः,हाथों की हथेलियों में,वो,साथ जीने-मरने की कसमें,हैं दफ़न
पर,उस पिघली हुई,बर्फ़ के फ़र्श पर------
उनकी मज़ारों पर, फूल महकते हैं,अब तलक----
                     बेशकः,आंखों से टपकी,चार बूंदे,गिरी थी,जो जुदाई में
                     पर,उस पिघली हुई,बर्फ़ के फ़र्श पर--------
                     हकीकतों के बुलबुलों सी,झलकती हैं अब तलक---
बेशकः,दूर बर्फ़ की चोटियों के उस पार से,चटकती हैं      ,हसरतें
पर,उस पिघली हुई,बर्फ़ के फ़र्श पर---
इंद्रधनुष सी झिलमिलाती हैं,अब तलक----
                                    तुम,आओ कि ना आओ
                                    हर्ज़ कोई भी नहीं-----
                                    पर,उस पिघली हुई,बर्फ़ के फ़र्श पर---
                                    जो,अभी पिघली नहीं है-----
                                    ढूंढ ही लेंगे उन्हें हम,कभी ना कभी----
                                    उन,कदमों के निशां,जो पिघले नहीं हैं---
                                                                   मन के-मनके     
  

10 comments:

  1. यूँ उजालों से वास्ता रखना
    शम्मा के पास ही हवा रखना...

    बर्फ के फर्श पर...निशान खोजने की कोशिश कुछ ऐसी ही है...

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  2. जिस,बर्फ़ के फ़र्श पर
    हम-तुम,चले थे,चार कदम,साथ-साथ
    वो,अभी पिघली नहीं है---waah

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  3. नहीं दिखती पर ऐसे ही अंकित होती है भावनाएं.. बर्फ के फर्श पर!
    सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  4. बहुत खूबसूरत रचना......
    ढूंढ ही लेंगे उन्हें हम,कभी ना कभी----
    उन,कदमों के निशां,जो पिघले नहीं

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  5. ढूंढ ही लेंगे उन्हें हम,कभी ना कभी----
    उन,कदमों के निशां,जो पिघले नहीं
    सुन्दर अभिव्यक्ति!
    सादर

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  6. काश कदमों के निशां बने रहें।

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    छठपूजा की शुभकामनाएँ!

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  8. सुंदर मन की सुंदर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  9. तुम,आओ कि ना आओ
    हर्ज़ कोई भी नहीं-----
    सुंदर प्रस्तुति.

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  10. बहुत ही नई कल्पना.

    बर्फ में भी जलन होती है
    एक उम्र की तपन होती है
    बीती यादों की हवि डालो तो
    जिंदगी एक , हवन होती है.

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