Friday, 1 August 2014

दग्ध मरु में--मरुद्धानों के पदचिन्ह




Everything is gift from existence----it is like a cloud full of rain---beginningless,endless----.
It has to be shared otherwise it becomes burden. Osho
घर-----
घर के एक पवित्र कोने में
धीर-धीरे,गरमाता,चूल्हा
बडे से पतीले में ओटता
चाय-चीनी-पत्ती-पानी
उठती हुई,भाप की मिठास
पीती हुई,दो-चार,पीढियां
आस-पास,सटे हुए,बैठे हुए
पीतल के गिलासों में
होंठों को सुलगाते हुए
बतियाते हुए,गतियाते हुए
अम्मा की,मनुहारों को
गिलासों में,उढकाते हुए
अपनों की महकों को
सिप-सिप,करते हुए
चाय के गिलासों को
पीते हुए----
ये आंधियां भी चलती रहेंगीं
ये अंधड भी,आंखो में
किरकिरी,भरते रहेगें
बारिशों में---
छप्पर,टपकते रहेंगे
चटकी हुई,छतों की मरम्मत
हर बरस,टलती रहेगी
पर----
ये चुस्कियां चायों की
बतयानी,बातों की
अपनों की कोहनियां
अपनों को,छूती रहेंगी
तो----
घर एक—
घर के एक पवित्र कोने में
चुल्हे पर ओटती—
चाय-चीनी-दूध-पत्ती की
पीतल की पतीलियां
यहां आ कर---
यहां से जाने की
परिभाषा को
पूरा कर जाएंगी.

8 comments:

  1. खूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 3/08/2014 को "ये कैसी हवा है" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1694 पर.

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  3. प्रशंसनीय रचना - बधाई

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  4. कोई कोना .. कोई एहसास बना रहना चाहिए ... चाय के सहारे ही सही ....

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  5. बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति

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